sumanasya
19 January 2026
वह पागल है
रात के अँधेरे मे सियालदाह स्टेशन मे
रेल लाइन पे जुगनू के राशनी ढूंढ़ता था
उसको पूछा था मैंने, क्या चाहते हौ तुम?
पेट भर खाना और चलता हुआ फेफड़े के सिवा?
ओ स्टेटन मे लगा हुआ पानी के नल से अपना मुँह धोया
और धीरे से बुदबुदाते हुए कहेंi
आखरी ट्रैन पे जो लोग घर जाते है
ओ लोग घर पौछ ने के बाद
इत्तला कर दे बस
[Translated by Suvajit Mondal]