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वह पागल है

रात के अँधेरे मे सियालदाह स्टेशन मे

रेल लाइन पे जुगनू के राशनी ढूंढ़ता था

उसको पूछा था मैंने, क्या चाहते हौ तुम?

पेट भर खाना और चलता हुआ फेफड़े के सिवा?

स्टेटन मे लगा हुआ पानी के नल से अपना मुँह धोया

और धीरे से बुदबुदाते हुए कहेंi

आखरी ट्रैन पे जो लोग घर जाते है

लोग घर पौछ ने के बाद

इत्तला कर दे बस

 

[Translated by Suvajit Mondal]

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