sumanasya
6 April 2025
सारी उम्र चुप रहते-रहते
वो बेज़ुबान हो गया।
अंत में सोचा —
चलो, ये भी ठीक है,
कम से कम बेज़ुबान के
कोई दुश्मन तो नहीं होते।
यही सोचकर
उसने सच से ही
अपनी दुश्मनी मोड़ लिया।
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